Puneet Verma Poetry
Advertisements

कोना कोना वृक्ष लगेगा, ये धुआं कहीं खो जाएगा ।

इक दिन ऐसा आएगा, जब हर शक्श जग जाएगा ।
कोना कोना वृक्ष लगेगा, ये धुआं कहीं खो जाएगा ।
चिड़िया होगी, कोयल होगी ।

अम्बिया की उस डाली पे, मिठी सी कोई हलचल होगी ।
मिशन ग्ग्रीन का फिर ये सपना, हर चेहरे पर खिल जाएगा ।
इक दिन ऐसा आएगा, जब हर शक्श जग जाएगा ।

Advertisements

खेतों में हरियाली आए, जीवन को हम मूल बनाएं

कब होगी बारिश जो बता दे, ऐसा हम इक टूल बनाएं
खेतों में हरियाली आए, जीवन को हम मूल बनाएं
धुंआ उगलती कारों को, ऊपर चढ़ती दीवारों को
हम रोक सकें तो रोक लें, इन धरा की दरारों को
हो सके तो पेड़ लगाएं, आसपास हम फूल उगाएं
खेतों में हरियाली आए, जीवन को हम मूल बनाएं

काहे ये पहाड़ गिर रहे, देखो नदियाँ सूख रही हैं
सदियों से जो प्यास बुझाए, काहे हमसे रूठ रही हैं
बढ़ते तापमान को रोके, ऐसा कोई रूल बनाएं
हो सके तो पेड़ लगाएं, आसपास हम फूल उगाएं
खेतों में हरियाली आए, जीवन को हम मूल बनाएं

मिशन ग्रीन हो जीवन में, ऐसा हम कानून बनाएं
ग्रीन ड्रीम का डोज़ चखें सब, ऐसा कोई स्पून बनाएं
हो सके तो पेड़ लगाएं, आसपास हम फूल उगाएं
खेतों में हरियाली आए, जीवन को हम मूल बनाएं

on this Diwali, only that’s the solution

Delhi is waiting for, those moments of light
shimmering with ghee lamps, beautiful that night
clean air without smog, roads those without clog
blessing of laxmi arrives, with sweets and bhog

the day of love, will arive in Delhi
incense of devotion, will dive in Delhi
smiles of elderly, will make us happy
with breath of purity, Diwali would be zappy

mission green delhi, wishes you happiness
with peace and devotion, spread the cleaniness
take the pledge, to stop the pollution
on this Diwali, only that’s the solution

कितने समझदार हैं हम, बच्चों को दिखलाएंगे

वो रात आने वाली है, जब हम विदेशी बन जाएंगे
भूल जाएंगे राम को, पैसा धुयें पे लुटाएंगे
लाखों का खर्चा होगा, शहर को बिगाड़ने में
कितने समझदार हैं हम, बच्चों को दिखलाएंगे

जिंदगी की ज्योत बुझाना, कर्म अपना होगा उस दिन
सांसों से जो लड़ रहे हैं, वो युद्ध समाप्त होगा उस दिन
गंदगी से भरी गालियां, बना के हम दिखलाएंगे
कितने समझदार हैं हम, बच्चों को दिखलाएंगे

माफ़ करें गर बुरा लगे तो, अज्ञानता पे छुरा लगे तो
ज्ञान की ज्योत दिवाली लाए, श्रीराम कथा में हम खो जाएं
मिशन ग्रीन की ज्योत जलाने, सबको हम बुलाएंगे
कितने समझदार हैं हम, बच्चों को दिखलाएंगे

– मिशन ग्रीन दिल्ली

Some paranormal seeds from mission green delhi

अगर इन्द्र तुम हो, तो शीतल कर दो । सूर्य को बोल कर, कुछ हल कर दो । रोक दो ब्रह्मांड को कुछ पल, कांप रहा गर्मी से समतल । घटा को बोलकर, जल देव को प्रबल कर दो । अगर इन्द्र देव तुम हो 🌿 पुनीत वर्मा की कलम से ©मिशन ग्रीन दिल्ली डॉट कॉम 🌧🌧🌧🌧🙏

एक दिव्य वृक्ष है, जो दिव्य बीज गिराता है । वो बीज अद्श्य रहकर भी, इक्क वृक्ष अन्य लगाता है । बुद्धि को वो शीतल करता, फिर मन तक वो बढ़ जाता है । इक दिव्य वृक्ष है, जो दिव्य बीज गिराता है । © मिशन ग्रीन दिल्ली

क्या बदलाव के लिए मैं अकेला ही काफी हूँ ? ऐ शीतल वृक्ष, क्या तू भी कुछ नही करेगा । एक एक बीज के सहारे, क्या तू भी नही बढेगा । गर तू भी रूठ गया हो तो, मांग रहा अब माफी हूं । क्या बदलाव के लिए, मैं अकेला ही काफी हूँ ? ©मिशन ग्रीन दिल्ली

छोड़ के मुझको यहां अकेला, कहाँ अचानक चली गयी

रहती थी वो साथ में मेरे, जाने वो किस गली गयी
जीवन की इस बगिया में, क्यों छोड़ के मुझको चली गयी
इक माँ थी जो सब मानती थी, इक माँ थी जो सब जानती थी
छोड़ के मुझको यहां अकेला, कहाँ अचानक चली गयी

माँ की मुझको याद सताए, ना वो अपने पास बुलाये
बहुत रो रहा मन ये मेरा, ना वो अपनी गोद सुलाए
कहीं दिखाई अब ना देती, धुप अचानक चली गयी
इक माँ थी जो सब मानती थी, इक माँ थी जो सब जानती थी
छोड़ के मुझको यहां अकेला, कहाँ अचानक चली गयी

वो कहती थी तुम नाम करोगे, सबका तुम ही ध्यान रखोगे
जो खुशियां हर पल सबको बांटे, ऐसा तुम ही ज्ञान रखोगे
मुझको सारी खुशियां देकर, ममता देकर चली गयी
इक माँ थी जो सब मानती थी, इक माँ थी जो सब जानती थी
छोड़ के मुझको यहां अकेला, कहाँ अचानक चली गयी

– मिशन ग्रीन दिल्ली

अभिमन्यु को सब आज बचाओ

शुरू हो गया प्रजातंत्र में, कुरुक्षेत्र का युद्ध ये देखो
सारे कौरव पीछे पड़ गए, अभिमन्यु के विरुद्ध ये देखो
कौन बचाए अभिमन्यु को, कोई उसको व्यूह बताओ
देश की खातिर शहर में अपने, अर्जुन को तुम आज जगाओ

अर्जुन देखो आज रो रहा, अपनों की इस पीड़ा में
अपनों में वो आज खो गया, वक़्त बिताए क्रीड़ा में
सब कुछ छोड़छाड़ कर अब तुम, अभिमन्यु की जान बचाओ
देश की खातिर शहर में अपने, अर्जुन को तुम आज जगाओ

धर्म मार्ग पर चलने को, कृष्ण हमे निर्देश दे रहे
धनुष उठाओ उनपर अब तो, जो हमको सब द्वेष दे रहे
मुश्किल लगता हर पल तुमको, ऐसा अब तुम कदम उठाओ
देश की खातिर शहर में अपने, अर्जुन को तुम आज जगाओ

– पुनीत वर्मा की कलम से, मिशन ग्रीन दिल्ली